Friday, March 17, 2023

चैत्र नवरात्रि, उगादी,गुड़ी पड़वा (Chaitra Navratri, Ugadi, Gudi Padwa)

 चैत्र नवरात्रि, उगादी,गुड़ी पड़वा

 

चैत्र नवरात्रिहिन्दु पंचाग के अनुसार चैत्रमाह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्रि शुरु होगी।

साल 2023 में 22 मार्च बुधवार के दिन से चैत्र नवरात्रि शुरु होगी।

22 मार्च को घटस्थापना होगी तथा 30 मार्च को रामनवमी के दिन नवरात्रि समाप्त होगी।

चैत्रनवरात्रि के पहले दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। नवरात्रि में माँ दुर्गा के 9 स्वरुपों की पूजा-आराधना की जाती है । मान्यता है कि जो भक्त 9 दिनों तक व्रत रखकर माँ दुर्गा की पूजा-आराधना करते हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

चैत्र नवरात्रि शुभ मुहूर्त –

चैत्र नवरात्रि घटस्थापना का मुहूर्त 22 मार्च दिन बुधवार को सुबह 06 बजकर 24 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।

कलश स्थापना –

  • प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नानादि नित्यक्रिया से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान की साफ-सफाई कर लें।
  • फिर एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति को स्थापित करें।
  • एक मिट्टी के पात्र में जौ या सात प्रकार के अनाज बो दें। इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें।
  • कलश पर स्वास्तिक बनाकर इस पर कलश बांधे। कलश में साबुत सुपारी, सिक्का और अक्षत डालकर आम के पत्ते रखें।
  • एक नारियल लें और उस पर चुनरी लपेटकर कलावा बांधे। इस नारियल को कलश के ऊपर रखते हुए देवी दुर्गा का आवाहन करें।
  • धूप दीप जलाकर कलश की पूजा करें। इसके साथ ही एक घी का दीपक लगातार 9 दिनों तक जलने दें।
  • इसके बाद माँ दुर्गा और उनके स्वरुपों की पूजा आरंभ करें।

  9 दिनों माँ के अलग-अलग स्वरुपों की पूजा –

  • नवरात्रि का पहला दिन – (22 मार्च 2023 दिन बुधवार )- माँ शैलपुत्री पूजा तथा घटस्थापना।
  • नवरात्रि का दूसरा दिन – (23 मार्च 2023 दिन गुरुवार )- माँ ब्रह्मचारिणि पूजा ।
  • नवरात्रि का तीसरा दिन – (24 मार्च 2023 दिन शुक्रवार )- माँ चंद्रघंटा पूजा ।
  • नवरात्रि का चौथा दिन – (25 मार्च 2023 दिन शनिवार )-माँ कुष्मांडा पूजा ।
  • नवरात्रि का पांचवां दिन - (26 मार्च 2023 दिन रविवार )- माँ स्कंदमाता पूजा ।
  • नवरात्रि का छठवां दिन – (27 मार्च 2023 दिन सोमवार )- माँ कात्यायनी पूजा ।
  • नवरात्रि का सातवां दिन – ( 28 मार्च 2023 दिन मंगलवार )- माँ कालरात्रि पूजा
  • नवरात्रि आठवां दिन (29 मार्च 2023 दिन बुधवार )- माँ महागौरी पूजा ।
  •  नवरात्ररि नौवां दिन (30 मार्च 2023 दिन गुरुवार )- माँ सिध्दिदात्री पूजा ।

इस वर्ष नवरात्रि में माँ दुर्गा अपने प्रिय भक्तों के यहाँ नौका पर सवार होकर आएंगी और नवरात्रि की समाप्ति पर गज (हाथी) पर सवार होकर देवलोक को वापस लौट जाएंगी।

 

उगादी पर्व 



( दक्षिण भारत में नववर्ष के रुप में मनाया जाने वाला त्योहार )

उगादी शब्द वास्तव में युगादी से बना हैं, जो युग तथा आदि से बना है । इसका शाब्दिक है- युग का आरंभ। माना जाता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया था। इसी दिन से नया संवत्सर शुरु होता है। इसलिए इस तिथि को नवसंवत्सर भी कहते हैं।

नव का अर्थ है नया तथा संवत् भारतीय वर्ष को कहते है, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहला दिन ) से हमारा भारतीय वर्ष आरंभ होता है।

उगादी पर्व कैसे मनाया जाता है –

उगादी पर्व दक्षिण भारत का प्रमुख पर्व है। दक्षिण भारत में नववर्ष के रुप में उगादी पर्व मनाया जाता है। इसे कर्नाटक ,आंध्र प्रदेश ,तेलंगाना राज्यों मे प्रमुख रुप से मनाया जाता है। उगादी के दिन सृष्टि की रचना करने वाले ब्रह्मा जी की पूजा की जाती है। इस शुभ दिन दक्षिण भारत के लोग प्रवेश द्वार पर आम के पत्तों के बंधनवार लगाते है तथा रंगोली बनाते हैं। इसके साथ ही उगादी के दिन घरों में पच्चड़ी नामक पेय पदार्थ बनाते है, जिसे प्रसादम् भी कहते है। यह पेय पदार्थ इमली ,आम, नारियल, नीम के फूल ,गुड़ जैसी चीजों से मिलकर बनता है। जो कि स्वास्थ्य के लिये अति गुणकारी होता है। इसके सेवन से चमड़ी का रोग भी दूर हो जाता है, तथा रोग प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ती है।

इस दिन आंध्र प्रदेश ओर तेलंगाना में बोवत्तु या पोलेलु व्यंजन बनाया जाता है। यह एक प्रकार का पराठा होता है जिसे चने की दाल, गेहूं के आटे, गुड़ और हल्दी आदि को पानी की सहायता से गूंथकर देशी घी में तलकर बनाया जाता है। साथ ही बेवु-वेल्ला नाम का व्यंजन भी बनाया जाता है जिसे गुड़ और नीम के मिश्रण से बनाया जाता है।

साल 2023 में 22 मार्च बुधवार के दिन यह उत्सव मनाया जाएगा।

     

गुड़ी पड़वा



गुड़ी पड़वा का पर्व चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहला दिन ) को मनाया जाता है। यह मुख्य रुप से महाराष्ट्र में मनाया जाता है। यह मुख्य रुप से महारराष्ट्र में मनाया जाता है। गुड़ी पड़वा दो शब्दों से बना है- गुड़ी ,जिसका अर्थ है ध्वज या झंडा और पड़वा जिसका अर्थ है प्रतिपदा यानी वर्ष का पहला दिन। मान्यता है कि इसी दिन भगवान राम ने बाली को मारकर लोगों को अत्याचार से मुक्ति दिलाई थी इसलिए लोगों ने भगवान राम की विजय का उत्सव मनाने के लिए  घर-घर में ध्वज फहराए थे। मराठी में ध्वज को गुड़ी कहते हैं। आज भी महाराष्ट्र के लोग इस दिन अपने घर के आँगन में ,छतों में गुड़ी (ध्वज) खड़ी करते हैं। इसीलिए वहाँ इस दिन को गुड़ी पड़वा कहते हैं।

एक अन्य मान्यता के अनुसार महाराष्ट्र में इसे मनाने का कारण मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की युद्ध में विजय से है। ऐसा माना जाता है कि उनके युद्ध में विजयी होने के बाद से ही गुड़ी पड़वा का त्योहार मनाया जाने लगा।

गुड़ी पड़वा को रवी की फसलों की कटाई का प्रतीक भी माना जाता है।

गुड़ी पड़वा कैसे मनाया जाता है

गुड़ी पड़वा के दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं । घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाई जाती है तथा मुख्य द्वार पर आम तथा अशोक के पत्तों से बने बंदनवार भी लगाये जाते हैं। तथा घर के आँगन में गुड़ी (ध्वज) खड़ी करते हैं। गुड़ी की पूजा करने से घर में सुख समृद्धि आती है।

इस दिन कई अलग तरह के पकवान बनाए जाते है। लेकिन मुख्य रुप से पूरन पोली बनाई जाती है। यह एक प्रकार की रोटी होती है । इसमें गुड़ , नमक, नीम के फूल, इमली और कच्चा आम मिलाया जाता है। इस रोटी का स्वाद खट्टा-मीठा होता है जिसे पूरा परिवार मिल-जुल कर खाता है। यह जीवन के खट्टे –मीठे स्वादों का प्रतीक होती है।




 

 

 

 

 

 


Tuesday, March 14, 2023

पापमोचनी एकादशी (Papmochani Ekadashi)

 

"पापमोचनी एकादशी"

शुभ मुहूर्त  (‌2023)

एकादशी तिथि प्रारम्भ 17 मार्च 2023 को दोपहर 02 बजकर 06 मिनट पर

एकादशी तिथि समाप्त 18 मार्च 2023 को सुबह 11 बजकर 13 मिनट पर


उदयातिथि के अनुसार इस वर्ष 18 मार्च शनिवार के दिन पापमोचनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा ।

व्रत पारण (तो‍‍ड़ने) का समय – 19 मार्च सुबह 6 बजकर 27 मिनट से 8 बजकर 7 मिनट पर

पापमोचनी एकादशी का अर्थ है पाप को नष्ट करने वाली एकादशी । पापमोचनी एकादशी का व्रत चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की ग्यारहवी तिथि को रखा जाता है। पापमोचनी एकादशी व्रत के परिणाम स्वरूप व्यक़्ति हर प्रकार के पाप से मुक़्त होता है। पापमोचनी एकादशी व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु की आराधना करने से सभी अनजाने मे हुई गलतियो से भी मुक़्ति मिल जाती है और सभी दुख दूर हो जाते है। मनुष्य अपने जीवन मे जाने-अनजाने मे कुछ ऐसे पाप कर्म कर बैठता है, जिसके कारण उसे इस जीवन मे व अगले जीवन मे दंड भोगना पड़ता है। ऐसे मे इन पापो से बचने के लिए पापमोचनी एकादशी का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। पापमोचनी एकादशी का व्रत रखने से साधक को जाने-अनजाने मे हुई गलतियो एवं पापों से मुक़्ति मिलने के साथ-साथ 1000 गोदान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। तथा इस व्रत को करने से ब्रह्महत्या , स्वर्ण चोरी , मदिरापान, अहिंसा और भ्रूणघात सहित अनेक घोर पापों के दोष से भी मुक़्ति मिलती है।

 पापमोचनी एकादशी पूजा विधि- पापमोचनी एकादशी का व्रत एक दिन पूर्व अर्थात्  दशमी तिथि की रात से ही आरम्भ हो जाता है। दशमी की रात से ही मनुष्य को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तथा सात्विक भोजन ग्रहण कर संयमित आचरण करना चाहिए।

  • पापमोचनी एकादशी के दिन प्रात काल स्नानादि नित्यक्रिया से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  •  पूजा स्थान पर भगवान का ध्यान करके पापमोचनी एकादशी के व्रत का संकल्प ले
  • पूजा करने से पहले घर के मंदिर में वेदी बनाकर 7 अनाज जैसे उड़द ,मूंग, गेहूँ, चना, जौ, चावल और बाजरा रखें 
  • वेदी के ऊपर कलश की स्थापना करें और उसमें आम या अशोक के 5 पत्ते लगाए।
  • वेदी पर भगवान श्री विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • धूप-दीप जलाकर सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजा करें। उनके सिंदूर लगाये, रोली-अक्षत से तिलक करे,फल-फूल व दूर्वा चढायें। जनेऊ चढायें और भोग लगायें।
  • तत्पश्चात भगवान विष्णु की पूजा करें। उनका पंचामृत से अभिषेक करायें, रोली-अक्षत से तिलक करें, तुलसी दल चढायें और भोग लगायें ।
  • विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
  • पापमोचनी एकादशी व्रत की कथा पढे या सुने।
  • धूप-दीप से भगवान विष्णु की आरती करें।
  • संध्या पूजन को समय भगवान विष्णु की आरती करने के पश्चात फलाहार ग्रहण करे।
  • इस व्रत में अन्न का सेवन नहीं करे । सिर्फ फलाहार करें।
  • व्रत में रात्रि जागरण करें ओर रातभर भगवान क भजन –कीर्तन करें।
  • व्रत के अगले दिन यानी द्वाद्शी तिथि को ब्राह्मण को भोजन करवायें और यथाशक्ति दान-दक्षिणा दें।
  • इसके बाद व्रत का पारण करें और स्वयं भोजन करें।

Tuesday, March 7, 2023

होली का पर्व और होलिका दहन

 

होली

होली, जिसे अक्सर "रंगों का त्योहार" या "प्यार का त्योहार" के रूप में जाना जाता है, भारत और दुनिया भर में हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला एक त्योहार है।  यह आमतौर पर मार्च में होता है और सर्दियों के अंत और वसंत की शुरुआत करता है।

लोग होली के दौरान दोस्तों और परिवार के साथ मिलकर गाते हैं, नाचते हैं और एक-दूसरे पर  अबीर और गुलाल लगाते हैं। यह जीवन के कई क्षेत्रों से व्यक्तियों के एक साथ जुड़ने और सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाओं को अस्वीकार करने का प्रतिनिधित्व करता है।

होली त्योहार का रंग खेलने के साथ-साथ धार्मिक महत्व भी है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का सम्मान करने के साथ-साथ हिंदू देवता भगवान विष्णु द्वारा अपने शिष्य प्रह्लाद को दुष्ट बुआ होलिका से बचाने की कथा के रूप में माना जाता है।



होली सद्भाव, प्रेम और खुशी का एक आनंदमय त्योहार है जो हिंदू संस्कृति और इतिहास का एक अभिन्न पहलू है।

होली एक दो दिवसीय कार्यक्रम है जो भारत में सबसे जीवंत और गतिशील में से एक है। लोग सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाते हैं और पहले दिन पूजा और अनुष्ठान करते हैं, जिसे होलिका दहन या छोटी होली के रूप में जाना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह होलिका के दहन का प्रतिनिधित्व करता है।




रंगवाली होली दूसरा दिन है, जब लोग अबीर, गुलाल और पानी की पिचकारियो  से सुसज्जित होकर सड़कों पर उतरते हैं। रंगों को एक-दूसरे पर डाला जाता है, और लोग नाचते, गाते और दावत देते हैं

रंग-बिरंगे उत्सवों के अलावा होली क्षमा करने और मनमुटाव दूर करने का समय है। पिछली असहमति या टकराव के बावजूद, लोग एक-दूसरे के घर जाते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं और गले मिलते हैं। यह प्रेम, सद्भाव और शांति फैलाने की होली की अवधारणा के अनुरूप है।

होली एक ऐसा त्योहार है जिसे सभी उम्र और पृष्ठभूमि के लोग प्यार करते हैं। बच्चे, विशेष रूप से, इसके लिए तत्पर रहते हैं क्योंकि यह उन्हें रंगों से खेलने और स्कूल से दो-चार दिनो की छुट्टी लेने की अनुमति देता है।

कुल मिलाकर, होली एक ऐसा त्योहार है जो उत्थान, आशावाद और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह एक ऐसा समय होता है जब लोग जीवन, प्रेम और बदलते मौसम का जश्न मनाने के लिए इकट्ठा होते हैं।

आधुनिक समय में होली का त्योहार नया रूप ले चुका है, फिर भी इसने अपनी ऐतिहासिक भावना को बरकरार रखा है। कई शहरों में संगीत, भोजन और पेय पदार्थों के साथ बड़े होली समारोह आयोजित किए जाते हैं। इंद्रधनुष जैसा माहौल बनाने के लिए लोग हवा में रंग फेंकते हुए उत्साहित संगीत पर नृत्य करते हैं।

पारंपरिक संगीत और प्रार्थना अभी भी कुछ क्षेत्रों में समारोह का एक महत्वपूर्ण तत्व है। उदाहरण के लिए, ब्रज में, उत्तरी भारत का एक क्षेत्र, इस त्योहार को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है दुनिया भर में भारतीय मुल के नागरिको द्वारा होली के त्योहार को मनाया जाता है, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया जैसे भारतीय मूल की आबादी वाले देशों में। ये त्यौहार, जिनमें अक्सर पारंपरिक संगीत, नृत्य और भोजन शामिल होते हैं, व्यक्तियों को अपनी सांस्कृतिक की जड़ों से जुड़ने और अपने वंश का सम्मान करने की प्रेरणा देता हैं।



होली ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता हासिल की है, जो कई मूल और संस्कृतियों से व्यक्तियों को आकर्षित करती है। इसके परिणामस्वरूप कई देशों में होली समारोह की स्थापना हुई है, जिसमें संगीत, नृत्य और रंग शामिल हैं, साथ ही विविध संस्कृतियों के लोगों को एक साथ आने और जश्न मनाने के लिए एक मंच भी दिया जाता है।

संक्षेप में, होली एक ऐसा त्योहार है जो हमेशा एकता, प्रेम और आनंद का आवश्यक संदेश देता है। यह एक ऐसा त्योहार है जो लोगों को एक साथ लाता है और उन्हें विविधता को स्वीकार करने और वैश्विक शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के महत्व की याद दिलाता है।   


एक बात और, आदिवासी समाज मे प्रत्येक कृषि उत्पाद के लिये “नवाखाई” पर्व होता है- जो भी नई फसल आई उसके लिये प्रकृति का धन्यवाद । होली भी किसानो के लिये कुछ ऐसा ही पर्व है होली के बहाने नये अन्न की पूजा पूरे देश मे की जाती है। यही नही, पूरी दुनिया मे होली की ही तरह अलग-अलग समय मे त्योहार मनाये जाते है, जिनका असल मकसद तनावो से दूर कुछ पल मौज-मस्ती के बिताना और अपने परिवेश के गैर जरूरी सामान से मुक्ति पाना होता है ।

समाज मे समरसता बनाये रखना, अपने परिवेश की रक्षा करना और जीवन मे मनो -विनोद बनाये रखना, यही होली का मूल दर्शन है ।

Tuesday, February 28, 2023

आमलकी एकादशी (Aamalki Ekadashi)

 

आमलकी एकादशी

एकादशी तिथि प्रारम्भ 2 मार्च 2023 को 6:39 AM से

एकादशी तिथि समाप्त 3 मार्च 2023 - 9:11 AM तक

उदया तिथि के अनुसार आमलकी एकादशी व्रत शुक्रवार 3 मार्च 2023 को रखा जायेगा। 

व्रत पारण(तोड़ने) का समय - 6:44 AM से 9:03 AM तक 



आमलकी एकादशी या रंग भरी एकादशी - 

आमलकी एकादशी को आंवला एकादशी और रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी के साथ-साथ आंवले के पेड़ की पूजा होती है।आंवले के पेड़ को देव वृक्ष कहा जाता है क्योंकि उसमे देवताओ का वास होता है आंवले के पेड़ की पूजा करने से सभी देवों का आशीर्वाद मिलता है।इस दिन आंवले के पौधे को लगाने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। 

ब्रज में होली का पर्व होलाष्टक से शुरू होता हैं। वही वाराणसी में होली का पर्व रंगभरी एकादशी (आमलकी एकादशी) से शुरू होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार महाशिवरात्रि पर विवाह के बाद भगवान शिव और माता पार्वती पहली बार इसी दिन अपनी प्रिय नगरी काशी आए थे, इसलिए इस दिन से वाराणसी में रंग खेलने का सिलसिला शुरू हो जाता है।


साल में  ये एकमात्र ऐसी एकादशी है जिसमें विष्णु जी के अलावा भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा भी की जाती है।

एकादशी के अगले दिन स्नान कर भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की उपासना कर जरूरतमंद तथा गरीबों को कलश, वस्त्र और आंवला आदि का दान करना चाहिए। इसके बाद भोजन ग्रहण कर उपवास खोलना चाहिए ।


Sunday, February 19, 2023

दिल्ली में अचानक तापमान बढ़ने के पीछे कारण

 दिल्ली में शनिवार को दिन का अधिकतम तापमान 29.6 डिग्री पर पहुंच गया। पिछले एक सप्ताह के मुकाबले दिन के तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सोमवार को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और मंगलवार को 31 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की उम्मीद है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों का दावा है कि क्षेत्र में बारिश की कमी तापमान में वृद्धि का कारण है।

"पिछले कुछ दिनों में, दिल्ली में या उसके आस-पास कोई बारिश नहीं हुई है। वर्तमान में, उत्तर-पश्चिम और पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में उच्च तापमान का अनुभव हो रहा है। अगले कई दिनों में एक पश्चिमी विक्षोभ का पूर्वानुमान दिल्ली में बारिश देने के लिए पर्याप्त मजबूत नहीं है।" , लेकिन इससे जम्मू और कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बारिश होने की उम्मीद है। हालांकि बुधवार के बाद तापमान में थोड़ी कमी आ सकती है, एक अधिकारी के अनुसार, दिन के समय तापमान अभी भी बढ़ने की उम्मीद है।


पिछले 30 वर्षों में तापमान के रुझान के अनुसार, 15 फरवरी और 19 फरवरी के बीच शहर में अधिकतम तापमान लगभग 24.2 डिग्री सेल्सियस है, जबकि न्यूनतम लगभग 11 डिग्री सेल्सियस है। 15 दिनों में अधिकतम तापमान 24 डिग्री के निशान को पार कर गया है। 


बहरहाल, न्यूनतम तापमान काफी हद तक सामान्य दायरे में बना हुआ है। रविवार को तापमान 11.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो साल के इस समय के लिए सामान्य है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के प्रतिनिधियों के अनुसार, ऐसा इसलिए है क्योंकि कोई बादल नहीं होता है, जो रात में गर्मी को फंसने से रोकता है और दिन के दौरान उच्च तापमान और सुबह अपेक्षाकृत ठंडा तापमान का कारण बनता है।


चैत्र नवरात्रि, उगादी,गुड़ी पड़वा (Chaitra Navratri, Ugadi, Gudi Padwa)

  चैत्र नवरात्रि , उगादी , गुड़ी पड़वा   चैत्र नवरात्रि – हिन्दु पंचाग के अनुसार चैत्रमाह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्रि शुरु होगी...